बीकानेर

स्टोरी: मास्क का इतिहास

आओ थोड़ा मास्क से परिचय करवाता हु।
यह मास्क का इतिहास आपके हेलोवीन पोशाक के लिए एक सांस्कृतिक मार्गदर्शिका मास्क ने समय की शुरुआत से ही मानव जाति के समारोहों और अनुष्ठानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। भेस, सुरक्षा, मनोरंजन या प्रदर्शन के लिए पहना जाने वाला मास्क, दुनिया भर के लोगों के सांस्कृतिक विकास का एक प्रमुख हिस्सा रहा है। सबसे पुराना संरक्षित मास्क वेस बैक में वापस आता है सबसे पुराना जीवित मास्क लगभग 9,000 साल पुराना होने के बावजूद, यह माना जाता है कि उनका उपयोग 40,000 साल पहले तक किया जाता था! वे लकड़ी और चमड़े से बने होते हैं, यही वजह है कि वे समय की कसौटी पर खरे नहीं उतरे। 7000BC शब्द ‘मास्क’ ने 1530 के दशक में अंग्रेजी भाषा में प्रवेश किया। कुछ लोग दावा करते हैं कि यह अरबी’आकाश ‘के अर्थ’ बुफून: दूसरों का मानना है कि यह स्पेनिश से आता है ‘ Mas Que la Cara का अर्थ ‘अतिरिक्त चेहरा प्राचीन मिस्र मिस्र, अंतिम संस्कार मास्क और अनुष्ठान मास्क पुरापाषाण अफ्रीका, अनुष्ठान और समारोह’ डेथ मास्क ‘आमतौर पर प्राचीन मिस्र की संस्कृति में उपयोग किए जाते थे। अपने भालू के समान डिजाइन, ये मुखौटे मिस्रियों के लिए अविश्वसनीय रूप से महत्वपूर्ण थे, जो मानते थे कि अफ्रीकी संस्कृति के लिए आवश्यक आत्मा अनुष्ठानों और समारोहों में मास्क के उपयोग पर बहुत निर्भर करती है। मास्क आम तौर पर मानव या पशु कल्पना के रूप में लेते हैं। वे विस्तृत रूप से सजाए गए हैं और उन जानवरों के गुणों को दर्शाते हैं जिन्हें वे चित्रित करते हैं। बुरी आत्माओं को भगाने और मौत के बाद अपने शरीर को पहचानने के लिए मास्क का इस्तेमाल किया गया ताकि वह वहां लौट सके। युग के पुजारी भी जानवरों या पूर्वजों के साथ आध्यात्मिक रूप से जुड़ते हैं। देवताओं और जानवरों के आकार में विस्तृत मुखौटे पहने (जिनमें से कई को एक पवित्र दर्जा दिया गया था)। सामग्री: लकड़ी, आइवरी, दांत, जानवरों के बाल, मिट्टी की सामग्री: कीमती धातुएँ, लिनेन, प्लास्टर, मिट्टी प्राचीन ग्रीस ग्रीस, थिएटर मास्क थिएटर के लिए डिज़ाइन किए गए थे, जहां अभिनेताओं ने उन्हें मजबूत अभिव्यक्तियों को संप्रेषित करने के लिए उपयोग किया था। इसने अभिनेताओं को प्रदर्शन के दौरान कई भूमिकाएं निभाने की अनुमति दी। डायोनिसस पंथ के सदस्य समूह के कुछ विरल समारोहों में संलग्न होने पर अक्सर खेल के मुखौटे लगाते हैं। ये मुखौटे सामाजिक स्थिति और पहनने वाले को पसंद करने के बावजूद पहनने वालों को छूट देने के लिए काम करते थे। सामग्री: लिनन, चमड़ा, लकड़ी और कॉर्क शास्त्रीय जापान जापान, युद्ध नकाब को विरोधियों में डर पैदा करने के लिए डिज़ाइन किया गया था, लेकिन पहनने वाले की भावनाओं को छिपाने के लिए भी काम किया। समुराई मुखौटे इसका एक आदर्श उदाहरण हैं। इंडोनेशियाई मास्क – आज, इंडोनेशिया (बाली और जावा), नृत्य सामग्री: लोहा और चमड़ा टॉपेंग नृत्य (इंडोनेशियाई – मुखौटा नृत्य ‘)। यह पूर्वजों के सम्मान में आयोजित आदिवासी नृत्यों से उत्पन्न हुआ। ज़िया राजवंश चीन, अनुष्ठान और रंगमंच में नर्तकियों को देवताओं को संदेश भेजने के लिए कहा गया था। टोपेंग नृत्य आज अक्सर स्थानीय गपशप और समकालीन संदर्भों के साथ पौराणिक कहानी को जोड़ते हैं। मुखौटे पारंपरिक रूप से शादियों द्वारा भूत भगाने और अंतिम संस्कार में इस्तेमाल किए जाते थे। आज, उत्सव अक्सर समारोहों के दौरान देखे जाते हैं – विशेष रूप से चीनी नव वर्ष। थिएटर प्रस्तुतियों में, मुखौटे में प्रत्येक रंग के साथ सख्त प्रतीकवाद होता है। बुराइयों और आत्माओं को दूर भगाने के लिए बाहरी मुखौटों का इस्तेमाल किया गया। उन्हें बाद में सैन्य सफलता का जश्न मनाने और प्रोत्साहित करने के लिए ओपेरा में भी इस्तेमाल किया गया था। 1100 के दशक – आज वेनिस, इटली, कार्निवल विस्तृत डिजाइन और मशरीरी (मुखौटा निर्माता) की प्रतिष्ठा से, मुखौटे (और अभी भी) वेनिस उत्सव का एक महत्वपूर्ण हिस्सा थे। विनीशियन मास्क 1200 लैटिन अमेरिका में युद्ध में गुमनामी प्रदान करने के लिए कार्य करते थे, युद्ध और अनुष्ठान एज़्टेक उच्च पुजारी मानव बलिदान करने के लिए बेहद विस्तृत सजावट के मुखौटे पहनते थे। मृतकों को भगाने के लिए मास्क का भी इस्तेमाल किया गया था। पार्टियों, लेकिन अब वे इतालवी संस्कृति का एक रहस्यमय और ग्लैमरस हिस्सा हैं। सामग्री: सामग्री: हड्डियां, पत्थर, सोना, मूंगा, खोल प्लास्टर, चीनी मिट्टी के बरतन, फिल्म में संगीत पर कार्यात्मक मास्क मास्क । डार्थ वाडर, वी, जेसन, आरा और स्क्रीम जैसे चरित्र सभी एक स्थायी छाप छोड़ते हैं लेकिन सांस्कृतिक अर्थ भी बहुत हैं। के गैस मास्क और आधुनिक कहानी कहने का एक अनिवार्य हिस्सा हैं। कई संगीतकारों ने केवल ऑर्ंट उद्देश्यों के कवर के पीछे मौजूद होना चुना, बी बालाक्लाव से वेल्डिंग मास्क, वे सभी एक उद्देश्य से कम नहीं एक मुखौटा की सेवा करते हैं। उल्लेखनीय मुखौटा पहनने वालों के ड्राफ्ट पंक, स्लिपनॉट, चुंबन और डूम के लिए इस्तेमाल शामिल है।। थिएटर में मास्क रेडियो, फिल्म और टीवी से पहले के दिनों में, आम जनता के लिए मनोरंजन का सबसे महत्वपूर्ण रूप था।

आज कोरोना काल में एक चीज ऐसी है जो पूरी दुनिया के लिए जरूरी हो गई है. वो चीज है मास्क, लेकिन क्या आपने कभी सोचा की जो मास्क आप पहनते हैं. उसने कितनी लंबी यात्रा तय की है. वो पहले कैसा दिखाई देता था? मास्क का इतिहास बहुत दिलचस्प है…

पिछले कई सौ वर्षों में कोरोना के खिलाफ जंग में अहम भूमिका निभा रहे मास्क ने कितने पड़ाव तय किए हैं. क्या आपको इसी जानकारी है कि कितनी बार मास्क का चेहरा बदला है?

मास्क का इतिहास

साल 1340

साल 1340 में बीक मास्क कहलाया, जब प्लेग की शुरुआत हुई थी. उस वक्त बदबू से बचने के लिए मास्क का इस्तेमाल किया जाता था. जानकारी के अनुसार चोंचदार मास्क में फूलों की पत्तियों से खुशबू होती थी.

साल 1600

करीब साल 1600 में रुमाल का इस्तेमाल मास्क के तौर पर हुआ. नाक और मुंह ढकने के लिए इस्तेमाल होने लगा.

साल 1897

आपको बता दें, साल 1897 में सर्जिकल मास्क अस्तित्व में आया. जब बैक्टीरिया की समझ के बाद रुमाल का बेहतर संस्करण किया गया.

साल 1910

साल 1910 में N-95 मास्क का पहला प्रारूप आया. चीन के मंचूरिया में प्लेग महामारी फैली तो महीन तार की जाली, सूती कपड़े से मास्क बनाया गया.

साल 1918

साल 1918 में स्पेनिश फ्लू आया तो उस बुरे वक्त में महामारी में मास्क लगाना प्रतीक बना और फिर मास्क का इस्तेमाल होने लगा.

साल 1930-40

साल 1930-40 में एयर फिल्टर गैस मास्क आया. जब विश्व युद्ध में जहरीली गैस से बचने के लिए इस्तेमाल किया गया.

साल 1961

साल 1961 में 3M सर्जिकल मास्क आए. दुनिया में पहली बार बबल वाला मास्क बना. जो मास्क के इतिहास में बड़ा बदलाव था.

साल 1970

पहली बार साल 1970 में N-95 मास्क तैयार हुए. पहली बार मापदंड और नियम तय हुए.

साल 1972

दो साल बाद ही यानी सन् 1972 में सिंगल यूज N-95 मास्क बनाए गए. 3M ने पहला सिंगल यूज N-95 मास्क बनाया था.

साल 1990

साल 1990 में टीबी से बचाव में मास्क की अहम भूमिका देखी गई. इलाज के दौरान N-95 मास्क का इस्तेमाल किया गया.

साल 2003

साल 2003 में चीन में सार्स महामारी में मास्क पहनना आम हो गया.

साल 2005

साल 2005 में प्रदूषण से बचाव में इस्तेमाल हुआ. प्रदूषण से बचने में N-95 मास्क का इस्तेमाल होने लगा.

साल 2010

साल 2010 में मशहूर फैशल डिजाइन एलेक्सेंडर मैक्वीन ने अपने फैशन शो में मास्क को फैशन गैजेट के तौर पर कुछ इस तरह से प्रस्तुत किया था.

साल 2020

लेकिन किसने सोचा था 2020 के चार महीने भी नहीं बीते होंगे और मास्क हमारे जीन का हिस्सा बन चुका होगा. साल 2020 में कोरोना महामारी में मास्क जीवन शैली का हिस्सा बना और वायरस से बचने में N-95 मास्क सबसे कारगर साबित हो रहा है.
आमजन सुत्ति कपड़े के बने मास्क, जो मैंने पहन रखा है, आप भी पहन सकते है ।।
आप सभी से मेरा निवेदन / अनुरोध / प्रार्थना है की इस मास्क को अपने जीवन का हिस्सा बना ले ……
क्योकी यह मास्क हमे corona संक्रमण के साथ साथ धूल मिट्टी और अन्य कई तरह के संक्रमण से बचाता है।

सर्वप्रथम मैं #Dinesh Gupta Bikaner जी का आभार प्रकट करता हु, दिनेश जी आपने इस महामारी मे कवरेज की और हमे घर बैठे शहर के लाइव समाचार दिए, इस दौरान कर्फ़्यूग्रस्त इलाके में बीमार आमजन तक दवाई पहुंचाना, पक्षियों को चुग्गा पानी की व्यवस्था करना ।। दिनेश जी तहदिल से शुक्रिया।
फेसबुक पर लाइव किया मास्क वितरण का कार्यक्रम जब #Poonam Joshi जी द्वारा निशुल्क मास्क वितरण किया जा रहा था । मुझे फेसबुक लाइव के माध्यम से ही जानकारी मिली की पूनम जोशी जी (शिक्षिका) पिछले महीने से ही स्वयं मास्क बना कर वितरण और corona के प्रति जन जन को जागरूक भी कर रही है। इन्होंने जो मास्क बनाये हैं वो तीन रंग का है, यह तीनों रंग हमे जोड़ते हैं , शौर्य का प्रतीक है,शांति का प्रतीक एवं अनेकता में एकता प्रदर्शित करता है ।। यह तीनों रंग हम सब भारतवासियो को आपस मे जोड़ते हैं । इस पुण्य कार्य के लिए Poonam Joshi जी हार्दिक आभार प्रकट करता हु , इस महामारी मे मास्क वितरण किया और आमजन को प्रेरित किया ।

Tags

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
Close